संदेश

सितंबर, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

🌸धरती का अमृत फूल महुआ 🌸

चित्र
                          🌸 महुआ 🌸 गोंड़ अपने देवताओं में महुआ फूल क्यों चढ़ाते हैं.. ? प्रकृति का पवित्र फूल -- महुआ के फूल धरती का प्रत्यक्ष कल्प वृक्ष ~ महुआ का वृक्ष इस धरती का अमृत --- महुआ के फूल ब्राह्मण मंदिर को भगवान का घर मानते हैं, इन मंदिरों के देवी देवताओं में भक्तों के द्वारा प्रतिदिन नाना प्रकार के खुशबूदार फूल चढाये जाते हैं... चार घण्टे बाद उस भगवान में चढा हुआ फूल मुरझा जाता है आठ घण्टे बाद सड़ जाता है, बारह घण्टे के बाद भगवान में चढा हुआ खुशबूदार फूल बदबू देने लगता है... अब विचारणीय तथ्य ये है कि जब मंदिर के भगवान के दर्शन मात्र से ये पापी शरीर पवित्र हो जाता है .... तो उस भगवान मे चढा हुआ फूल सड़कर बदबू नही देना चाहिए..... बल्कि पवित्र होकर और दुगुना खुशबू देना चाहिए, लेकिन ऐसा नही होता, भगवान में चढा हुआ फूल सड़कर बदबू देता है तो इंसान कैसे पवित्र हो सकता है..? इसी बात को विचार करना है..! इसीलिए हंमारे पुरखा हंमारे देवताओं में महुआ फूल चढ़ाते हैं,.... क्यों..? क्योंकि महुआ का फूल...

शूद्र यानी (SC,ST,OBCs) वही रामायण गा गा कर खुद को हो गाली देता है। कभी रामायण में लिखी चौपाईयो का अर्थ नही समझता।।।

चित्र
रामायण में राम का बहाना दे कर खुद शूद्रों को गा गा कर गाली दिया और आज भी शूद्र यानी (SC,ST,OBCs) वही रामायण गा गा कर खुद को हो गाली देता है। कभी रामायण में लिखी चौपाईयो  का अर्थ नही समझता।।। चलिए आज आपको रामायण में लिखी सत्यता को दिखाते हैं👇👇 🔴 *मौलिक जानकारी*🔴     जिस रामायण मे जात के नाम से गाली दिया गया है, उसी रामायण को शूद्र लोग रामधुन  (अष्टयाम) मे अखण्ड पाठ करते है, और अपने को गाली देते है । और मस्ती मे झाल बजाकर निम्न दोहा पढते है :- *जे बरनाधम तेलि कुम्हारा, स्वपच किरात कोल कलवारा*।। (तेली, कुम्हार, किरात, कोल, कलवार आदि सभी जातियां नीच 'अधम' वरन के होते हैं) *नारी मुई गृह संपत्ति नासी, मूड़ मुड़ाई होहिं संयासा*                 (उ•का• 99ख  03)  (घर की नारी 'पत्नी' मरे तो समझो एक सम्पत्ति का नाश हो गया, फिर दुबारा दूसरी पत्नी ले आना चाहिए, पर अगर पति की मृत्यु हो जाए तो पत्नी को सिर मुंड़वाकर घर में एक कोठरी में रहना चाहिए, रंगीन कपड़े व सिंगार से दूर तथा दूसरी शादी करने की शख्त मनाही होनी च...

एक चूहा एक कसाई के घर में बिल बना कर रहता था।

एक चूहा एक कसाई के घर में बिल बना कर रहता था। एक दिन चूहे ने देखा कि उस कसाई और उसकी पत्नी एक थैले से कुछ निकाल रहे हैं। चूहे ने सोचा कि शायद कुछ खाने का सामान है। उत्सुकतावश देखने पर उसने पाया कि वो एक चूहेदानी थी। ख़तरा भाँपने पर उस ने पिछवाड़े में जा कर कबूतर को यह बात बताई कि घर में चूहेदानी आ गयी है। कबूतर ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि मुझे क्या? मुझे कौनसा उस में फँसना है? निराश चूहा ये बात मुर्गे को बताने गया। मुर्गे ने खिल्ली उड़ाते हुए कहा… जा भाई.. ये मेरी समस्या नहीं है। हताश चूहे ने बाड़े में जा कर बकरे को ये बात बताई… और बकरा हँसते हँसते लोटपोट होने लगा। उसी रात चूहेदानी में खटाक की आवाज़ हुई, जिस में एक ज़हरीला साँप फँस गया था। अँधेरे में उसकी पूँछ को चूहा समझ कर उस कसाई की पत्नी ने उसे निकाला और साँप ने उसे डस लिया। तबीयत बिगड़ने पर उस व्यक्ति ने हकीम को बुलवाया। हकीम ने उसे कबूतर का सूप पिलाने की सलाह दी। कबूतर अब पतीले में उबल रहा था। खबर सुनकर उस कसाई के कई रिश्तेदार मिलने आ पहुँचे जिनके भोजन प्रबंध हेतु अगले दिन उसी मुर्गे को काटा गया। कुछ दिनों बाद उस कसाई की पत्नी सही...

ब्राम्हण संविधान को समाप्त क्यो करना चाहता उसके कारण नीचे के बिंदुओं से जाने-

ब्राम्हण संविधान को समाप्त क्यो करना चाहता उसके कारण नीचे के बिंदुओं से जाने- (1).संविधान के आर्टिकल 340 के अनुसार obc, sc, st हिन्दू नही है। इसका पता हिन्दू शास्त्रों से भी चलता है।हिन्दू शास्त्र मनुस्मृति के अनुसार चार वर्ण और जातियां इस प्रकार है (1)ब्राम्हण एक वर्ण एक जात। (2)क्षत्रिय एक वर्ण एक जात। (3)वैश्य एक वर्ण एक जात। (4)शुद्र एक वर्ण लेकिन 6000 से अधिक टुकड़ो में(जाट,गुर्जर,धोबी,लखारा,माली,तेली,निषाद,लूहार, धनगर,नाई, सोनार,चामर,भंगी,खटीक,रैगर, नायक,सुथार,राव,आदि आदि) जातियां बांट रखी है , ताकि ये जाति व्यवस्था से टुकड़ो में ही रहे संगठित नही हो।ओर इनको बाटने वाले का ये कभी विरोध नही कर सके। इन 6000 से ज्यादा सभी जातियों को संविधान में अनुसूचीयोँ के अनुसार अनुसूचित जनजाति(ST) अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ी जाति(obc) का संवैधानिक दर्जा दिया गया। (2).हिन्दू शास्त्र मनुस्मृति के अनुसार इन सभी शुद्रो तेली ,तम्बोली, भंगी,चामर,जाट, गुर्जर,आदि को ऊपर के तीनों वर्णो की सेवा करने का ही काम रहता था। शुद्रो को धन रखने का अधिकार नही था। शुद्रो को अच्छे कपड़े पहनने का अ...

आरक्षण बहुत सही गणित है ,जरा ध्यान दे हमारे गणित पर ।

आरक्षण का गणित: एक तार्किक दृष्टिकोण साथियो, आरक्षण का मुद्दा हमारे समाज में बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। इसे समझने के लिए आइए एक सरल उदाहरण से इसे परिभाषित करें। यह गणित केवल तथ्य को समझाने के लिए है, ताकि हम इसकी गहराई को जान सकें। उदाहरण: माना कि 100 व्यक्ति हैं, और इन 100 व्यक्तियों को खाने के लिए 100 रोटियां उपलब्ध हैं। अब, देखते हैं कि यह वितरण कैसे होता है: पिछड़ी जाति (OBC): 60 व्यक्तियों के लिए केवल 27 रोटियों की व्यवस्था है। अनुसूचित जाति (SC) और जनजाति (ST): 25 व्यक्तियों के समूह को 22.5 रोटियां दी जाती हैं। सामान्य वर्ग (GENERAL): 15 व्यक्तियों के लिए शेष 50 रोटियां बचती हैं। लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है जब सामान्य वर्ग के भीतर 3% ब्राह्मण जाति के कुछ बेहद शक्तिशाली लोग 50 रोटियों में से 45 रोटियां खा जाते हैं। अब, सामान्य वर्ग के बाकी 12 लोग केवल 5 रोटियों पर जीवनयापन करने के लिए मजबूर हैं। यही कारण है कि सामान्य वर्ग के जाट, मराठा, लिंगायत, पटेल या पाटीदार समुदाय अपने लिए OBC के 27 रोटियों में हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं। वर्तमान समस्या: ...